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स्कूल और कॉलेज के दिनों में हम अक्सर 'कूल' (Cool) दिखने वाले लड़कों से दोस्ती करना चाहते हैं। उनकी मीठी बातें और स्टाइल हमें आकर्षित करता है। हम इसे सच्ची दोस्ती समझ लेते हैं, लेकिन कई बार यह सिर्फ Dosti Ka Bhram होता है। यह कहानी 'आदर्श नगर' के एक पढ़ाकू लड़के आर्यन और स्कूल के सबसे लोकप्रिय लेकिन मतलबी लड़के विक्की की है। विक्की ने आर्यन का इस्तेमाल करना चाहा, लेकिन आर्यन ने अपनी बुद्धि से बाजी कैसे पलट दी, यह कहानी हमें जीवन का एक बड़ा पाठ पढ़ाती है।
कहानी: नोट्स, पिज़्ज़ा और एक बड़ा झूठ
आर्यन की दुनिया और विक्की का जलवा
आदर्श नगर के 'सेंट ज़ेवियर्स स्कूल' में आर्यन 9वीं कक्षा का सबसे होनहार छात्र था। वह पढ़ाई में अव्वल था, लेकिन स्वभाव से थोड़ा सीधा और शर्मीला था। उसके पास गिने-चुने दोस्त थे, जिनमें सुमित उसका सबसे पक्का यार था। सुमित हमेशा आर्यन को कहता, "भाई, तू बहुत सीधा है, दुनिया बहुत टेढ़ी है। संभलकर रहा कर।"
दूसरी तरफ था विक्की। विक्की अमीर बाप का बिगड़ा हुआ बेटा था। उसके पास महंगी घड़ी, नई साइकिल और ढेर सारा एटीट्यूड था। स्कूल के ज़्यादातर लड़के विक्की के पीछे-पीछे घूमते थे ताकि उसकी 'कूल गैंग' का हिस्सा बन सकें। आर्यन भी दूर से विक्की को देखकर सोचता, "काश! मेरी भी विक्की से दोस्ती होती।"
लेकिन विक्की आर्यन जैसे 'पढ़ाकू' लड़कों से बात करना अपनी शान के खिलाफ समझता था।
अचानक उमड़ा प्यार
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तभी वार्षिक परीक्षाएं (Final Exams) नज़दीक आ गईं। विक्की ने साल भर कुछ नहीं पढ़ा था। उसे पता था कि अगर इस बार फेल हुआ, तो उसके पापा उसकी बाइक ज़ब्त कर लेंगे। उसे ज़रूरत थी किसी ऐसे की जो उसका प्रोजेक्ट पूरा कर दे और उसे चीटिंग के लिए नोट्स दे सके।
अचानक विक्की का व्यवहार बदल गया। एक दिन लंच ब्रेक में विक्की खुद आर्यन की टेबल पर आया। "हाय आर्यन! यार, मैंने सुना है तू मैथ्स में जीनियस है," विक्की ने अपनी सबसे प्यारी मुस्कान के साथ कहा। आर्यन हैरान रह गया। "ह.. हाँ, ठीक-ठाक हूँ।"
विक्की ने उसके कंधे पर हाथ रखा, "अरे शर्मा मत यार! तू तो स्कूल की शान है। हम सबको तुझ पर गर्व है। वैसे, आज शाम को क्या कर रहा है? मेरी तरफ से तुझे 'बर्गर पार्टी'। हम कुछ देर पढ़ाई भी करेंगे और मस्ती भी।"
आर्यन को यकीन नहीं हुआ। स्कूल का सबसे कूल लड़का उसे पार्टी दे रहा है? उसे लगा उसकी लॉटरी लग गई है। सुमित ने उसे कोहनी मारी और धीरे से कहा, "आर्यन, मत जा। यह विक्की मतलब के बिना किसी को पानी भी नहीं पूछता। ज़रूर कोई चाल है।"
लेकिन आर्यन पर तो दोस्ती का भ्रम छाया हुआ था। उसने सुमित को डांट दिया, "तू तो बस जलता है उससे। विक्की दिल का बुरा नहीं है।"
झूठी दावत का सच
शाम को आर्यन अपनी किताबें लेकर विक्की के आलीशान घर पहुँचा। विक्की ने उसका स्वागत ऐसे किया जैसे वह कोई वीआईपी (VIP) हो। "आजा मेरे भाई! तेरे बिना तो मैं अधूरा हूँ," विक्की ने उसे ड्राइंग रूम में बैठाया।
थोड़ी देर इधर-उधर की बातें करने के बाद विक्की असली मुद्दे पर आया। "देख आर्यन, तू मेरा जिगरी यार है। मेरे पापा ने मुझे बहुत डांटा है। मुझे साइंस और मैथ्स के 5 प्रोजेक्ट्स कल जमा करने हैं। अगर तू मेरी मदद कर देगा, तो मैं बच जाऊंगा। तू तो चुटकियों में कर लेगा ना?"
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आर्यन ने देखा कि मेज़ पर बर्गर या पिज़्ज़ा नहीं, बल्कि अधूरी कॉपियों का पहाड़ रखा था। आर्यन ने हिचकिचाते हुए कहा, "लेकिन विक्की, ये तो बहुत ज़्यादा काम है। मुझे अपनी पढ़ाई भी करनी है।"
विक्की का चेहरा बदल गया। उसकी आवाज़ में अब मिठास नहीं, धमकी थी। उसने कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया। "देख पढ़ाकू, तुझे दोस्त माना है, इसलिए प्यार से कह रहा हूँ। यह काम पूरा करके ही तू यहाँ से जाएगा। वरना कल स्कूल में तेरी वो हालत करूँगा कि तू किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगा। और हाँ, बर्गर काम ख़त्म होने के बाद मिलेगा।"
आर्यन की होशियारी
आर्यन का दिल धक से रह गया। उसे सुमित की बात याद आई—"मतलबी लोग सिर्फ काम निकलवाना जानते हैं।" उसे समझ आ गया कि वह दोस्ती के नाम पर एक पिंजरे में फंस गया है। विक्की शारीरिक रूप से उससे ताकतवर था, लड़कर निकलना नामुमकिन था। उसे दिमाग का इस्तेमाल करना था।
आर्यन ने घबराने के बजाय एक गहरी सांस ली। उसने चेहरे पर मुस्कान ओढ़ी और बोला, "अरे विक्की भाई! तूने तो डरा ही दिया। मैं तो मज़ाक कर रहा था। दोस्त के लिए इतना तो कर ही सकता हूँ। ला, दे मुझे कॉपियां।"
विक्की खुश हो गया। "यह हुई ना बात! तू काम शुरू कर, मैं वीडियो गेम खेलता हूँ।"
आर्यन ने 10 मिनट तक लिखने का नाटक किया। फिर उसने अपना सिर खुजाया और परेशान होने का नाटक करने लगा। "क्या हुआ?" विक्की ने पूछा।
आर्यन ने कहा, "यार विक्की, एक गड़बड़ हो गई। यह जो साइंस का प्रोजेक्ट है ना, इसमें 'स्पेशल डायग्राम' बनाने हैं। उसके लिए मेरे पास जो 'मैजिक पेन' और 'ज्योमेट्री बॉक्स' था, वो मैं घर भूल आया। उसके बिना अगर प्रोजेक्ट बनाया, तो टीचर पक्का रिजेक्ट कर देंगे। और तेरे पास वो सामान होगा नहीं क्योंकि वो सिर्फ़ मेरे पास है।"
विक्की घबरा गया। "तो अब क्या होगा?"
आर्यन ने कहा, "तू चिंता मत कर। मेरा घर पास ही है। मैं दौड़कर जाता हूँ और सामान लेकर 5 मिनट में आता हूँ। तब तक तू मैथ्स के सवाल लिख ले।"
विक्की को पढ़ाई की ज़रा भी समझ नहीं थी, वह आर्यन की बातों में आ गया। उसे लगा कि काम बिगाड़ने से अच्छा है आर्यन को जाने दे। "ठीक है, जल्दी जा और 5 मिनट में वापस आ," विक्की ने दरवाज़ा खोला।
सबक और नई शुरुआत
जैसे ही आर्यन विक्की के घर से बाहर निकला, उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह सीधा अपने घर गया और दरवाज़ा बंद कर लिया। उसने अपना फोन स्विच ऑफ कर दिया और अपनी पढ़ाई में लग गया।
अगले दिन स्कूल में विक्की का चेहरा गुस्से से लाल था। वह आर्यन को मारने के लिए बढ़ा। लेकिन आर्यन आज अकेला नहीं था। वह अपने सच्चे दोस्त सुमित और स्कूल के पी.टी. टीचर के साथ खड़ा था।
आर्यन ने विक्की की आँखों में आँखें डालकर कहा, "विक्की, प्रोजेक्ट तो तुझे खुद ही बनाना पड़ेगा। और रही बात दोस्ती की, तो दोस्त खरीदे नहीं जाते, कमाए जाते हैं।" टीचर को पास देखकर विक्की कुछ नहीं कर पाया। प्रोजेक्ट जमा न करने पर उसे सजा मिली और आर्यन ने उस दिन एक बड़ा सबक सीखा।
निष्कर्ष: सुमित की माफी
आर्यन ने सुमित को गले लगाया और माफ़ी मांगी। "तू सही था भाई। वो चमकती चीज़ सोना नहीं थी, पीतल थी। असली सोना तो तू है।" उस दिन आर्यन का दोस्ती का भ्रम टूट गया, लेकिन उसे एक सच्ची दोस्ती की कीमत समझ आ गई।
इस कहानी से सीख (Moral)
इस कहानी से बच्चों को यह सीख मिलती है:
चापलूसी से सावधान: जो अचानक आपकी बहुत तारीफ करने लगे, समझ जाइए उसे आपसे कोई काम है।
सच्चा दोस्त: सच्चा दोस्त वो है जो आपको गलत काम करने से रोके, न कि वो जो सिर्फ मतलब के लिए साथ हो।
बुद्धि का प्रयोग: मुसीबत में डरने के बजाय ठंडे दिमाग से काम लेना चाहिए।
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